कहने को तो बाबू लाल जी अंगूठा छाप थे लेकिन शहर में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं था जो बाबू लाल जी को न जानता हो ।
बाबू लाल जी जो कुछ भी आज थे सब उनकी मेहनत और लगन का फल था
बाबू लाल की ज़िन्दगी में किसी बात की कोई कमी नहीं थी लेकिन एक बात उनको हमेशा सताती रहती थी ।
और वो थी उनका पुत्र विनोद, विनोद बहुत ही शरारती और आवारा क़िस्म का लड़का था पढाई से तो उसका छत्तीस इंच का आकड़ा था।
बाबू लाल को यही चिंता सताई रहती थी कहीं उनका बेटा भी उनकी तरह अंगूठा छाप न निकल जाये उन्होंने विनोद के ऊपर हर एक्सपेरिमेंट कर लिया
लेकिन विनोद नहीं सुधरा उसकी आवारागार्दियाँ दिन पे दिन बढ़ती ही जा रहीं थी वो बहुत ही नालायक पुत्र था विनोद को हर बात बहुत जल्दी बुरी लग जाती थी ।
आज पुरे पांच साल हो गए जब उसने अपने सबसे बेस्ट फ्रेंड निकेत से बात करना छोड़ दी थी
बात सिर्फ इतनी थी की निकेत के पिता ने विनोद से इतना कहे दिया था
की तुम मेरे बेटे से न मिला करो वरना तुम उसे ख़राब कर दोंगे।
विनोद को ये बात दिल पे लग गयी और उसने निकेत से बोलना बंद कर दिया । जहाँ एक तरफ बाबू लाल एक दम अंगूठा छाप थे
वहीँ दूसरी ओर निकेत के पिता बहुत ही जादा पढ़े लिखे और निकेतन इण्टर कॉलेज के हेड मास्टर थे
वो इतने अच्छे शिक्षक थे उनका पढ़ा हुआ हर एक विद्यार्थी आज कुछ न कुछ बन चुका था ।
बाबू लाल और निकेत के पिता प्रकाश जी के बीच भी जादा नहीं बनती थी
लेकिन बाबू लाल को एक बात हमेशा खलती थी की अगर उनके बीच हमेशा वो दोस्ती रहती तो उनका लड़का शायद उनसे कुछ सीख पाता । राम प्रकाश थोड़े खडूस टाइप के थे वो जादा किसी से मिलते जुलते नहीं थे ।
खैर इस तरह एक साल बीत गया विनोद का आज परीक्षा फल आना था । जैसा की बाबू लाल को अपने पुत्र से उम्मीद थी वैसा ही हुआ विनोद फिर से मेट्रिक में फ़ैल हो गया । बाबू लाल को विनोद से कोई उम्मीद नहीं रहे गयी थी विनोद उनका एक लौता पुत्र था वहीँ दूसरी और निकेत प्रथम श्रेणी से पास हुआ था उसी रात बाबू लाल की तबियत बिगड़ने लगी और वो चल बसे । बिनोद को अपने पिता की मृत्यु से ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा । और उसकी आवारा गर्दियाँ यूं हीं चलती रही । उस दिन शाम को विनोद कहीँ से मौज उड़ा के घर वापिस लौट रहा था ।
राम प्रकाश अपने बगीचे में पानी दे रहे थे उन्होंने
जब विनोद को वापिस आते देखा तो पड़ोस के मिश्रा जी से ज़ोर से चिल्लाते हुए बोले मिश्रा जी
आपको मिठाई पसंद तो आई न निकेत प्रथम श्रेणी से पास हुआ है और अगली बार देखना वो टॉप करेगा
तब तो मै आपको मिठाई खिला खिला के शुगर का मरीज़ बना दूंगा, मिश्रा जी जवाब में बोले अरे यार तुम ने तो मुझे ऊपर भेजने का प्लान अभी से बना लिया है
इस पर जवाब में प्रकाश जी बोले, अरे मिश्रा जी अगर आप चल बसे तो कम से कम आप आपके पास रोने बाले लोग तो होंगे वरना आज कल के लड़के तो बाप के मरने पर भी उनमे कोई फर्क नहीं आता पता नहीं ऐसे लोग कैसे जी लेते हैं, और मै ये आशा करता हूँ मेरे अंतिम समय में कम से कम मेरा पुत्र भी मेरे साथ होगा ।
और हाँ मिश्रा जी निकेत के पास होने की ख़ुशी में मैं उसको तोहफा देना चाहता हूँ एक साइकिल । विनोद को ये बात बुरी तो लगी लेकिन उसने अपना गुस्सा घर पर निकाला जाके ।
घर पे पहुच के उसने देर रात तक शराब पिके हंगामा किया अपनी माँ के साथ । और अपनी माँ से पैसे मांगने लगा और वो निकेत को निचा दिखाने के चक्कर में अपनी माँ से मोटर साइकिल के लिए पैसे मांगने लगा । उसकी माँ और हंगामा नहीं चाहती थी इसलिए उन्होंने उसे पैसे दे दिए । अगले दिन जब निकेत स्कूल से वापिस अ रहा था तो उस समय विनोद अपनी नयी मोटर साइकिल की नुमाइश करता फिर रहा था । घर पर जाके निकेत ने ये बात अपने पिता को बताई । अगले दिन शाम के समय प्रकाश जी मिश्रा जी से बोले ।
मिश्रा जी लोग आज कल मोटर साइकिल पे घूमते फिरते है बाप के पैसे पर बहुत घमंड दिखाते हैं एक मेरा लड़का है जिसे मैंने सोचा पास होने की ख़ुशी में साइकिल दिल दूं लेकिन उसकी खुद्दारी के आगे मैं कुछ न कर सका मेरे पुत्र ने अपने पैसे से साइकिल खरीदी है और मुझे उस पर फक्र है वरना कुछ बाप तो उसी फ़िक्र में चले जाते है उनके बेटे का कुछ नहीं होने वाला और उनकी तरह वो भी कहीं अंगूठा छाप न रहे जाये ।
विनोद ने उनकी सारी बाते सुनी आज विनोद को बहुत ही बुरा लगा और उसने तय कर लिया की वो प्रकाश जी को इसका जवाब देगा । अगले दिन सुबह सुबह विनोद कहीं पैदल जा रह था हाथ में किताबे लिए हुए । प्रकाश जी को ये बात थोड़ी अजीब लगी आज उन्होंने कोई ताना नहीं मारा । अगले दिन जब प्रकाश जी ने इसकी इन्वेस्टीगेशन की तो पता चला विनोद ने अपनी मोटर साइकिल बेच दी है और आज कल वो पढाई में अधिक ध्यान दे रहा है ।
शाम को जब विनोद पढाई करके वापिस घर को अ रहा था तो प्रकाश जी ने ताना मारते हुए कहा चाहे लोग कितना पढ़ लें लेकिन इस बार तो निकेत ही टॉप करेगा । विनोद कुछ नहीं बोला और सीधा घर को बड़ चला ।
अब विनोद के व्यव्हार में बहुत ही फर्क पढ़ रहा था घर पे जब वो खाना खा रहा था तो अपनी माँ से बोल मम्मी हमारे पड़ोस में जो प्रकाश जी हैं वो हमेशा खाने में करेले खाते होंगे कभी मीठा नहीं बोला जाता उनसे ।
उसकी माँ ने जवाब में इतना ही कहा भक पागल ऐसा नहीं बोलते वो एक अच्छे शिक्षक है । विनोद भी अपनी माँ से और नहीं उलझना चाहता था क्योकि अब वो सुधरने लगा था । परीक्षा फल का दिन आया और इस बार कमाल हो गया था पहेली बार मोहल्ले में किसी ने टॉप किया था और वो निकेत नहीं विनोद था ।
आज विनोद बहुत खुश था और उसकी माँ को भी बहुत ख़ुशी मिली थी । वो विनोद से खाने के समय पर बोली बेटा आज मैंने तेरे लिए तेर फेवरेट कढ़ी चावल बनाया है । अगर तेरे पापा आज ज़िंदा होते तो उन्हें तुझ पर फक्र होता ।
और आजपहली बार विनोद को अपने पिता की कमी महसूस हो रही थी । वो अपने कमरे में ही चला गया बिना खाना खाये और अपने पिता की तस्वीर को सीने से लगा के खूब रोया और बोला पापा मैंने हमेशा आपको दुःख दिए कभी आपको अपना पिता नहीं माना मुझे माफ़ करदो पापा मै बहुत शर्मिंदा हूँ आप वापिस आ जाओ न पापा और मुझे गले से लगा लो पापा i miss you i m so sorry papa आपके ज़िंदा रहते हुए मैं कभो आपको खुश नहीं रख सका मैंने आपको हमेशा शर्मिंदा किया है अगर माँ का ख्याल रखने वाला कोई होता तो मैं सच में आप के पास अ जाता हमेशा के लिए |
और अपने पिता की तस्वीर को सीने से लग के रोते रोते कब वो सो गया पता ही नहीं चला । अगले दिन विनोद सुबह उठा और नाश्ता करके कॉलेज जाने से पहले अपने माँ से चिपट के खूब रोया और बोला माँ मैं पिता जी के जीते जी उनको खुश नहीं रख सका लेकिन मैं उनका नाम कभी भी लोगो के ज़ेहन से निकलने नहीं दूंगा मैं आपसे वादा करता हूँ की मैं आपका और पिता जी का नाम रोशन कर दूँगा । और वो स्कूल को निकल गया । इस तरह दो साल बीत गए और और विनोद ने इंटर में टॉप किया और कॉलेज में प्रवेश लिया इसी तरह विनोद ने अपना स्नातक भी कम्पलीट कर लिया ।
स्नातक के बाद उसने अपने बलबूते पर एक अच्छी नौकरी भी प्राप्त कर ली । आज जो कोई भी विनोद को देखता तो यही कहता वो देखो बाबू लाल जी का पुत्र है उन्ही की तरह ईमानदार और होशियार । आज विनोद को अपने पिता का नाम रोशन करके बहुत ही गर्व महसूस होता था और साथ ही उनकी कमी भी खलती थी ।
अब जब भी विनोद का सामना प्रकाश जी से होता तो प्रकाश जी बिना एक शब्द कहे मुस्कुरा देते थे । और विनोद को बहुत ही गुस्सा आता उनको देख के ।लेकिन वो कुछ नहीं कहता उनसे असल में विनोद अब कोई ऐसा काम नहीं करना चाहता था जिससे उसके पिता जी का नाम ख़राब हो । शायद यही वजह थी की वो पर्काश जी से कुछ नहीं कहता ।
एक दिन जब विनोद ऑफिस से घर आया तो प्रकाश जी के वहां बहुत सन्नाटा था विनोद को ये बात थोड़ी अजीब सी लगी । उसने खाने के समय अपनी माँ से कहा माँ आज कमाल है न हमारे पडोसी बहुत शांत है । इस पर उसकी माँ ने कहा पर्काश जी बहुत ही बीमार हैं और निकेत भी उनको देखने नहीं
आया सिंगापुर से फ़ोन पे बात हुई थी बोला वो नहीं अ पायेगा बहुत काम है उसे वहां पे । इस पर विनोद अपनी माँ से बोला माँ क्या आपको नहीं लगता पर्काश जी अपनी करनी भुगत रहे हैं ???
विनोद के इतना कहते ही उसकी माँ ने उसको जोरर से तमंचा दे जड़ा और विनोद से बोली तू ऐसा कहने वाला होता कौन है । विनोद माँ से बोला आप उस इंसान के कारणं मुझसे झगड़ रहीं है जिसने हमेशा मेरी बेइज़्ज़ती की है और मुझे नीचा दिखाया है और आज उनका अपना पुत्र उनका साथ छोड़ चुका है जिस पर वो बहुत गर्व करते थे हमेशा उसकी तारीफो के पुल बांधते रहते थे !!!!
इस पर उसकी माँ ने उसके दो तीन और तमाचे जड़े और उससे बोलीं आज तेरे पिता ज़िंदा नहीं है और उन्हने अपने अंतिम समय में हम लोगो से एक वादा किया था लेकिन मुझे लगता है अब वो वादा मुझे तोडना पड़ेगा । मुझे माफ़ कर दीजियेगा वो अपने आप से बोली। विनोद अपनी माँ से बोला हमसे पापा ने वादा किया था इसका क्या मतलब है माँ ?????
विनोद की माँ विनोद से बोलीं जब तेरे पापा अपनी आखरी सासे गिन रहे थे । उनको तब भी तेरी ही चिंता थी और उन्होंने मुझसे कहा कि उनकी मुलाकात पर्काश जी से करा दे और उन्होंने मुझे कसम दी थी की इस बात को मै हमेशा राज़ रखूँ । तेरे पिता ने प्रकाश जी से कहा था की मुझे अपने पुत्र से कोई उम्मीद नहीं है लेकिन आप एक अच्छे शिक्षक है और मै चाहता हूँ की आप विनोद को इस काबिल बनाये की समाज में वो अपना नाम रोशन कर सके और प्रकाश जी ने तेरे पिता से वादा किया था वो ज़रूर ऐसा करेंगे । जीते जी तो वो हमेशा एक दूसरे से दूर रहे लेकिन तेरे पिता की अंतिम समय में वो अपने बिछड़े दोस्त से खूब चिपट के रोये थे अगर तेरे पिता ज़िंदा होते तो अभी भी वो एक दूसरे के दुश्मन होते । और विनोद बिना कुछ कहे ये सब सुने जा रहा था उसकी आँखों से आंसू टपक रहे थे ।
तो जैसा की प्रकाश जी ने तेरे पापा से वायदा किया था तो उन्होंने तुझे सुधारने की ज़िम्मेदारी ली थी प्यार से समझा के तो तुझे सुधारना नामुकिन था तो उन्होंने इसके लिए एक नया तरीका अपनाया । तुझे क्या लगता है वो हर समय तुझे ताने इसी लिए सुनाते थे की तुझे नीचा दिखा सकें । वो जानते थे तुझे कितना जल्दी बुरा लगता है इसलिए वो हमेशा तुझे ताने मारते थे उन्हें मालूम था के एक दिन उनकी कोई न कोई बात तेरे दिल पे लगेगी और हुआ भी वही।। तू आज जो कुछ भी है उनके तानो की वजह से है वो नहीं होते तो तो पड़ा होता किसी नाले में पिए हुए.
विनोद के आँखों से आंसू रुक ही नहीं रहे थे ।। विनोद के तो होश ही उड़ गए थे सच सुनके और आंसू उसकी आँखों से रुक ही नहीं रहे थे । विनोद हर उस बात पे पछता रहा था जो वो प्रकाश जी के बारे में सोचता था ।। विनोद ने अचानक अपने आंसू पोछे और प्रकाश जी के घर तरफ बढ चला जब वो उनके घर पंहुचा तो देखा प्रकाश जी पलंग पे लेटे हुए अपनी अंतिम सासे गिन रहे थे वो फ़ौरन जाके उनसे लिपट लिपट के रोने लगा और रोते रोते सिर्फ एक ही बात कहे रहा था क्यों अंकल ऐसा क्यों अब तो सच बता दिया होता जो आप मुझे देखना चाहते तो वो मै आज हूं क्यों नहीं बता दिया सच !!!!!
प्रकाश जी ने उसके कान में फुसफुसते हुए कहा क्योकि मैंने अपने दोस्त सेवादा जो किया था । और विनोद के मुह से बस यही शब्द निकले अंकल आप ने खुद को जला किसी की ज़िन्दगी में रौशनी की है ।।।
प्रकाश जी के मुह से एक शब्द भी नहीं निकला ।।
शायद अब वो ये बात अपने दोस्त को बताने लिए जा चुके थे के
तुम्हारे बेटे को सच पता चल गया है
लेकिन मैंने अपना वादा नहीं तोडा ................
By: Talib Ali Khan